Description
‘‘मौहब्बत’’ मेरी चतुर्थ गज़ल संग्रह है। हर एक गज़ल में प्रेम की व्याख्या मनुष्य की अन्तरात्मा से जोड़कर की गई है। मैने जीवन के इस संघर्ष और मौहब्बत के पलों को गजलों के रूप में संग्रह कर, शब्दों की झील से सींच कर उसकी माला बनाने का पूर्ण प्रयास किया है, जिससे संसार मे मौहब्बत की लौ हमेशा सबके दिल मे ज़लती रहे। लक्ष्य की आशा मन को मोह लेती है। प्रयास के धनुश से निकलने वाले बाण कभी लक्ष्य को भेद जाते हैं तो कभी असफल हो जाते हैं। यह तो समय की बाहों मे निहीत है।











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