Description
आध्यात्म का किसी धर्म, संप्रदाय या मत से कोई संबंध नहीं है। हम अपने अंदर से कैसे हैं, आध्यात्म इसके बारे में है। आध्यात्म का मतलब भौतिकता से परे जीवन का अनुभव करना है। अगर हमको बोध है कि हमारे दुःख, क्रोध, क्लेश के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है, बल्कि हम खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं, तो हम आध्यात्म मार्ग पर हैं। हम जो भी कार्य करते हैं, अगर उसमें सभी की भलाई निहित है, तो हम आध्यात्म हैं। अपने अहंकार, क्रोध, नाराज़गी, लालच, ईर्ष्या और पूर्वाग्रहों को गला देना आध्यात्म हैं। बाहरी परिस्थितियां चाहे जो भी हों, उनके बावजूद भी अपने अंदर से हमेशा प्रसन्न और आनंद में रहना भी आध्यात्म है। अगर इस सृष्टि की विशालता के सामने हम खुद की स्थिति को आभास करते हैं तो हम आध्यात्म की राह पर हैं। आध्यात्म की आवश्यक विशेषताओं को श्रीमद भागवत गीता से लिया गया है। जिसमे यह उभर कर आता है कि आध्यात्म एक अंतर्मुखी प्रक्रिया है जो आत्म-खोज से परिचय कराती है।










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